रिचर्ड्स का सम्प्रेषण सिद्धांत

आई.ए.रिचर्ड्स का संप्रेषण सिद्धांत

ऽ          पूर्व प्रचलित प्रेषणीयता शब्द की नवीनव्याख्या करते हुए रिचर्ड्स ने कहा कि-प्रेषणीयता कोई अद्भुत या रहस्यमय व्यापारनहीं है, अपतिु मन की एक सामान्य क्रिया मात्रहै। प्रेषणीयता में जो कुछ होता है, वह यह है किकुछ विशेष परिस्थितियों में विभिन्न मस्तिष्कप्रायः एक जैसी अनुभूति प्राप्त करते हैं। जबकिसी वातावरण विशेष से एक व्यक्ति कामस्तिष्क प्रभावित होता है तथा दूसरा उसव्यक्ति की क्रिया के प्रभाव से ऐसी अनुभूतिप्राप्त करता है जो कि पहले व्यक्ति की अनुभूतिके समान होती है, तो उसे प्रेषणीयता कहते हैं।वस्तुतः किसी अन्य की अनुभूति को अनुभूतकरना ही प्रेषणीयता है। (कवि कलाकार यासर्जक की अनुभूतियों का भावक द्वारा अनुभूतकिया जाना ही संप्रेषण है।)

ऽ          रिचर्ड्स के मतानुसार- संप्रेषण के लिएतीन बातें आवश्यक हैं-

1.            कलाकृति की प्रतिक्रियाएं एकरस हों

2.            वे पर्याप्त रूप से विभिन्न प्रकार कीहों

3.            वे अपने उत्तेजक कारणों द्वाराउत्पन्न किए जाने योग्य हों।

ऽ          उन्होंने स्पष्ट किया कि कला मेंप्रेषणीयता आवश्यक है, किंतु कलाकार कोइसके लिए विशेष प्रयत्न नहीं करना चाहिए।कलाकार जितना सहज एवं स्वाभाविक रूप मेंअपना कार्य करेगा, उसकी अनुभूतियां उतनी हीसंप्रेषणीय होंगीं।

ऽ          संप्रेषण तभी पूर्णता से होता है, जबविषय रोचक और रमणीय होता है।

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